Teri hai zameen

It is your land your sky you are merciful please grace us

you are equal to everyone, everyone is equal to you, o! God please grace us

It is your land your sky you are merciful please grace us

you are equal to everyone, everyone is equal to you, o! God please grace us

It is your land your sky you are merciful please grace us

you are equal to everyone, everyone is equal to you, o! God please grace us

It is your land your sky you are merciful please grace us

you are equal to everyone, everyone is equal to you, o! God please grace us

O… with your wish we came in this world

with your wish we came in this world

With your grace we all have got this body and soul

please keep your graceful eyes on us in all conditions
It is your land your sky you are merciful please grace us

you are equal to everyone, everyone is equal to you, o! God please grace us

 

if you wish you give life and if you wish you take our life

if you wish you give life and if you wish you take our life

O… we bow in front of you

 

O… the supreme power if you wish you can save us from problems

It is your land your sky you are merciful please grace us

you are equal to everyone, everyone is equal to you, o! God please grace us

It is your land your sky you are merciful please grace us

you are equal to everyone, everyone is equal to you, o! God please grace us

It is your land your sky you are merciful please grace us

you are equal to everyone, everyone is equal to you, o! God please grace us

Sita went to meet Ram

The event: Sita with curiousness goes to see Ram.

The description of this event by Tulsiji elude my heart such that I am inclined to add certain lines from my side. Even I broke my tradition to write in English.

Later I will translate this post in English.

आज प्रातः राम कथा सुन्नेका अवसर मिला. कथाकार सीता ओर राम के मिलन की बात कर रहेथे. ओर मन को जाने क्या होगया के तुलसीदास के दोहे मे कुछ ओर लिखने की इच्छा हो गई.

तुलसीदास जी कहते हे की राम सुबह मिथिला की पुष्पवाटिका मे लक्ष्मण के साथ पुष्प चुनने आते हे. सीता भी अपनी बहनो ओर सहेलियो के साथ गोरी पूजा के लिए वाटिका के पास के मंदिर मे आती हे.

एक सखी सब से पीछे रह जाती हे, जो सीता के पास आते ही राम ओर लक्ष्मण की बात करती हे, उस ने दोनो भाई को देखा हे, दोनो सुंदर हे, उन्होने सबपे मोहनी डाली हे. सखी सीता को एक बार उन्हे देखने को कहती हे.

सीता भी उन्हे देखने को उत्सुक हो जाती हे. ओर सब के साथ पुष्पवाटिका की ओर चल पड़ती हे.
तुलसीदासजी कहते हे, “सीता के घुघरू छनकते हे जेसे वो रास्ते मे आते तालाब से गुजरती हे, उनको देखतेही फुलो से लदी डाली भी झुक जाती हे, शर्माती थोड़ी लाजाति वो राम को देखने चली”.

तुलसीदासजी ने थोड़ासा श्रीगार रस मिलाया हे इस प्रसंग मे ओर मे जो की इस प्रसंग मे खोगई हू कुछ ओर जोड़ना चाहती हू

“सीता अपनी सखियो ओर बहनो के साथ माता की पूजा कर रही थी जब एक सखी वाटिका मे आए दो राजकुमार की सूचना देती हे, साथ ही दोनो की मनोहर छबि के गुण बखनती हे ओर सभी सीता को उन्हे एक बार देखेने की बात करती हे.
सीता के मन मे दोनो को देखने की इछा हो आती हे, ओर वो सखियो के साथ वाटिका की ओर चल पदती हे.
कोमल पाव पर मेहदी सजी हे, जब ये कोम्ल पाव धरा पर रखती हे तो पायल का मधुर स्वर गुजते हे. मीठे पायल के सुर से हवा मे मिठास फेल गयी, लताए जुक गयी हे